हे गाइज़ तो कैसे है आप सब आशा करते है की आप सब बहुत अच्छे होंगे।आप सब तो जानते ही है की इस भाग – दौड़ भरी ज़िंदगी में इंसान हर वक्त किसी ना किसी बात से बात से परेशान है। जिसके कारण लोग दिमाग़ में ओवेरथिंकिंग करना शुरू कर देते है। इसमें व्यक्ति छोटी-सी चिंता को भी बड़ा बनाकर बार-बार उसी पर ध्यान लगाता रहता है जैसे कि – “क्या होगा?”, “क्यों हुआ?”, “लोग क्या सोचेंगे?” जैसी सोचें लगातार दिमाग़ में घूमती रहती हैं। इससे दिमाग में तनाव, डर और उलझन बढ़ती है, नींद और फोकस प्रभावित होते हैं और आत्मविश्वास कम होने लगता है। यानी, ओवरथिंकिंग वो आदत है जिसमें दिमाग समस्याएँ कम और परेशानियाँ ज़्यादा पैदा करने लगता है।
ओवेरथिंकिंग के कारण इंसान लगातार अपने दिमाग़ में सोच पैदा करता रहता है और वो धीरे – धीरे मानसिक प्रॉब्लम से गुजरने लगता है।मानसिक प्रॉब्लम होने के कारण लोगों को अनेको बीमारियों का सामना करना पड़ता है। ओवेरथिंकिंग करने से दिमाग़ पर बहुत ही बुरा असर पड़ता है।ओवेरथिंकिंग के कारण दिमाग़ में टेन्शन, डिप्रेशन, लख्वा जैसी बीमारियों का ख़तरा लगा रहता है। ओवेरथिंकिंग के कारण नींद आना बंद हो जाता है, जिससे की आप आसानी से रिलैक्स भी नही हो पाते। तो आयिए जानते है कि ओवेरथिंकिंग को कैसे कम किया जाए। अगर आप में से कोई भी ऐसी बीमारी से गुजर रहा है तो हमारे आर्टिकल को लस्त तक ज़रूर पढ़े।
“मस्तिष्क को काम दो” चैलेंज

ओवेरथिंकिंग जब बढ़ती है जब आपका दिमाग़ ख़ाली रहता है। इसलिए जब आपको लगता है की आपको कोई थॉट परेशान कर रहा है या फिर आप लगातार उसके बारे में सोच – सोच कर परेशान हो रहे है तो रिलैक्स होने के लिए आप अपने माइंड को तुरंत किसी और काम में लगा सकते है। दिमाग़ को शांत करने के लिए आप कोई भी घरलू कम कर सकते है या फिर आप बाहर घूमने जा सकते है या फिर कोई पज़ल सॉल्व कर सकते है जिससे कि आपका दिमाग़ और मन दोनो उस चीज़ से हट जाए। ये छोटी- छोटी गतिविधियाँ दिमाग का फोकस तुरंत बदल देती हैं और सोच की दिशा नेगेटिव से पॉज़िटिव एक्टिविटी की ओर शिफ्ट हो जाती है। इससे ओवरथिंकिंग रुकती है, दिमाग हल्का होता है और मन पर तुरंत नियंत्रण वापस आने लगता है।
जिग्सॉ ट्रिक

जिग्सॉ ट्रिक ओवेरथिंकिंग रोकने के लिए एक बेस्ट उपाय है। जब भी आपको कुछ ऐसा लगे की आपका माइंड ओवेरथिंकिंग कर रहा है या फिर किसी नेगेटिव बात में उलझता जा रहा है और मन शांत नही हो पा रहा है तो आप इस ट्रिक को ट्राई कर सकती है।जैसे – किसी छोटी-सी मानसिक पज़ल को सॉल्व करना शुरू कर दें। फ़ोर इग्ज़ैम्पल – कमरे में पाँच चीज़ें ढूँढना जो एक ही रंग की हों, अपने नाम के अक्षरों से पाँच नए शब्द बनाना, या किसी चीज़ में तीन अनोखे डिटेल्स नोट करना। ऐसा करने से दिमाग का ध्यान पज़ल हल करने में लग जाता है। जिससे वह ओवरथिंकिंग के लूप से बाहर आ जाता है। यह ट्रिक तुरंत ब्रेन का फोकस बदलती है, सोच को हल्का करती है और मानसिक तनाव को मिनटों में कम कर देती है।
हँसी थेरपी

हँसी, जो हर प्रॉब्लम का समाधान है। हँसी थेरपी ओवरथिंकिंग को उसी पल रोकने का एक बेहद शक्तिशाली, लेकिन अक्सर इस तरीक़े को अनदेखा किया जाता है। लेकिन सच तो यही है की ये ओवेरथिंकिंग को रोकने की बहुत पावरफुल ट्रिक है। जब भी आपको ऐसा लगे की आपका दिमाग़ ओवेरथिंक कर रहा है जिसके कारण आपका मन भी उदास है तो एक बार 10 – 15 मिनट के लिए जबदस्ती की हँसी हँस ले इससे बॉडी को हँसी का संकेत मिलता है, जिसके कारण ब्रेन तुरंत खुश हॉर्मोनस रिलीज़ करता है और तनाव पैदा करने वाले केमिकल कम हो जाते हैं। अचानक बदलाव ओवरथिंकिंग के लूप को काट देता है और मन हल्का, शांत और पॉज़िटिव महसूस करने लगता है। हँसी असली हो या फेक दिमाग फर्क नहीं जानता; बस वह ओवरथिंकिंग मोड से बाहर आकर रिलैक्स मोड में शिफ्ट हो जाता है। इस ट्रिक को बहुत से डॉक्टर के द्वारा भी लोगों को सजेस्ट किया जाता है।
“मूवी डिरेक्टर” ट्रिक

“मूवी डिरेक्टर” ट्रिक ओवरथिंकिंग को तुरंत रोकने का एक क्रिएटिव और दिमाग पर सीधा असर करने वाला तरीका है। जब भी आपको कभी ऐसा लगे की आपका दिमाग़ बहुत हाई उल्टी – सीधी बातों के बारे में सोच रहा है और वो बात आपको बहुत खाए जा रही है जिससे कि आप रिलैक्स नही हो पा रहे हो जिसके कारण आपका मन भी उदास है तो उस वक्त उस थॉट को एक फ़िल्म का सीन मान लें, और खुद को उस फ़िल्म का डायरेक्टर। फिर अपने आप से कहें – “कट” ये सीन मुझे पसंद नहीं… इसे बदलते हैं।” इसके बाद उस सोच का बैकग्राउंड, सीन, आवाज़ या एंडिंग अपने हिसाब से बदल दीजिए। आप चाहें तो उसे पॉज़ कर सकते हैं, स्लो मोशन कर सकते हैं, या उसे फ़नी बना सकते हैं ताकि डर की पकड़ टूट जाए। जब दिमाग महसूस करता है कि आप कंट्रोल में हैं, ओवरथिंकिंग तुरंत रुक जाती है। यह ट्रिक नेगेटिव सोच को एक कल्पना में बदल देती है, जिससे मन हल्का और शांत हो जाता है।
नींद और सेल्फ-केयर पर ध्यान

ओवेरथिंकिंग अक्सर तब बढ़ती है जब आपका दिमाग़ ख़ाली बैठा होता है या फिर जब आप प्रॉपर तरीक़े से आराम नही मिलता। अगर आप हर दिन एक प्रॉपर तरीक़े की नींद नही ले रहे है तो इसका सबसे बुरा असर हमारे दिमाग़ के ऊपर पड़ता है जिससे आपका मन भी चिड़चिड़ा हो जाता है और साथ – साथ आपके दिमाग़ का भी डिस्टर्ब सा हो जाता है जिसके कारण आपके दिमाग़ में बुरे – बुरे ख़यालात आने शुरू हो जाते है। इसीलिए ओवेरथिंकिंग को रोकने के लिए प्रॉपर नींद लेना बहुत ज़रूरी है। साथ ही सेल्फ-केयर – जैसे हल्का स्ट्रेचिंग, गर्म पानी पीना, स्क्रीन टाइम कम करना, और अपने लिए 5 मिनट की रिलैक्स ब्रेक लेना। दिमाग को शांत करता है और मानसिक ऊर्जा वापस देता है। जब शरीर रिलैक्स होता है, तो मन खुद-ब-खुद शांत मोड में चला जाता है और फालतू सोच रुकने लगती है। यानी, बेहतर नींद और छोटी-छोटी सेल्फ-केयर आदतें ओवरथिंकिंग को जड़ से कंट्रोल करती हैं।
भरोसेमंद इंसान से बात करें

कई बार ऐसा होता है की बातों को सोच – सोच कर दिमाग़ बहुत ज़्यादा प्रेशर फ़ील करने लगता है जिससे की मन भी बहुत भर सा जाता है तब किसी भरोसेमंद इंसान से बात करने का मन करता है जिससे की हम अपने दिल और दिमाग़ की सारी बातें शेयर कर सके। जिससे की आप हल्का और अच्छा महसूस कर सके। ये ओवरथिंकिंग को रोकने का सबसे आसान और प्रभावी तरीका माना जाता है। क्योंकि हम अक्सर अपने मन की बातें अकेले ही संभालने की कोशिश करते हैं, लेकिन जब उन्हें शब्दों में किसी के सामने रखते हैं, तो सोच का बोझ आधा महसूस होने लगता है। किसी ऐसे व्यक्ति से बात करें जो आपको समझता हो, बिना जजमेंट सुने, और जिसे आपकी भावनाओं की परवाह हो। बात करते ही दिमाग को लगता है कि आप अकेले नहीं हैं—जिससे ओवरथिंकिंग तुरंत धीमी हो जाती है।
बेवजह मोबाइल/सोशल रोकें

ओवेरथिंकिंग का सबसे बड़ा कारण हमारा मोबाइल और सोशल मीडिया होता है। क्योंकि हम कई बार फ़ोन में देखी गयी दूसरों की लाइफ़ से अपनी लाइफ़ की तुलना करने लगते है, और बहुत छोटी – छोटी बातों को दिल पर ले लेते हैं। जिसके कारण मन बहुत उदास फ़ील करता है और दिमाग़ में भी नेगेटिव थॉट आने शुरू हो जाते है। इसीलिए जब भी आपको ऐसा लगे की आपका मन उलझ रहा है या सोच का बोझ बढ़ रहा है, तो फ़ोन को अपने आपसे कुछ समय के लिए दूर रख दे। यह छोटा-सा ब्रेक दिमाग को ओवरलोड से बचाता है, मन शांत करता है और लगातार चल रही फालतू सोच को रोक देता है। ऐसा करने से आपके दिमाग़ और मन दोनो को शांति मिलेगी जिसके कारण ओवेरथिंकिंग खुद पे खुद कम हो जाएगी।
गहरी साँस + 5-4-3-2-1 ग्राउंडिंग

कई बार ऐसा होता है की आप दिमाग़ पर कुछ चीजों का ज़्यादा हाई प्रेशर ले लेते है जिससे की आपका दिमाग़ ओवर्लोड हो जाता है।जब दिमाग तेज़ी से भागने लगता है तो आप अपने आपको रिलैक्स नही कर पाते है जिसके कारण आपका दिमाग़ ओवेरथिंक करने लगता है। इसीलए इसे रोकने के लिए शुरुआत करें एक लंबी, धीमी गहरी साँस से यह आपके दिमाग को संकेत देता है कि वह सुरक्षित है। इसके बाद 5-4-3-2-1 तकनीक अपनाएँ: 5 चीज़ें देखें, 4 चीज़ें छुएँ, 3 आवाज़ें सुनें, 2 चीज़ों की खुशबू महसूस करें, और 1 चीज़ का स्वाद नोट करें। यह छोटी-सी प्रक्रिया आपके दिमाग को नेगेटिव सोच से हटाकर आसपास की चीज़ों पर फोकस करा देती है। जैसे ही ध्यान बाहरी दुनिया पर आता है, मन शांत होने लगता है और ओवरथिंकिंग का लूप टूट जाता है। जिसके कारण दिमाग़ हल्का और फ़्रेश महसूस करता है।
थॉट्स लिखो, दिमाग पर लोड मत रखो

जब कई बार दिमाग में बहुत सारे विचार एक साथ घूमते रहते हैं, तो वे अंदर ही अंदर जमा होकर ओवरथिंकिंग का बड़ा कारण बन जाते हैं।ऐसे में अपने थॉट को एक काग़ज़ पर लिख लेना सबसे बेहतरीन तरीक़ा है। ऐसा करने से आपके मन का बोज भी हल्का हो जाता है और आप रिलैक्स भी फ़ील करते है। और दिमाग को राहत मिलती है। क्योंकि उसे अब उन विचारों को स्टोर करके रखने की जरूरत नहीं पड़ती। यह तरीका सोच को बाहर निकालकर दिमाग़ को हल्का करता है, मन को साफ़ करता है और ओवरथिंकिंग का प्रेशर तुरंत कम कर देता है। लिखी हुई बात अक्सर दिमाग जितनी बड़ी नहीं लगती, जिससे मन शांत होता है और विचारों पर कंट्रोल वापस आता है। और आप बहुत अच्छा महसूस करते है। इसीलिए इस ट्रिक को एक बार ज़रूर ट्राई करे।
पॉजिटिव सेल्फ-टॉक

ओवेरथिंकिंग बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है की हम अंदर ही अंदर अपने आप से नेगेटिव बातें करते रहते हैं -“मैं नहीं कर पाऊँगा”, “सब गड़बड़ हो जाएगा”, “मैं काफी अच्छा नहीं हूँ।”जिसके कारण आपका आत्मविश्वाश भी डगमगा जाता है। और आप अपने आपको बहुत कमजोर महसूस करते है। इसीलिए पॉज़िटिव सेल्फ-टॉक इस नेगेटिव शोर को शांत करने का सबसे सीधा और प्रभावी तरीका है। जब भी दिमाग डर या उलझन पैदा करे, तुरंत अपने आप से कुछ भरोसा देने वाले वाक्य बोलें जैसे -“मैं इसे संभाल सकता/सकती हूँ,” “ये सोच सिर्फ़ एक विचार है, सच्चाई नहीं,” या “मैं बेहतर चीज़ों का हकदार/हकदार हूँ।” यह तरीका दिमाग को नई दिशा देता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और ओवरथिंकिंग के लूप को तोड़ देता है।धीरे-धीरे मन समझने लगता है कि डर नहीं, बल्कि आपकी बात सही है और इसी से सोच शांत होने लगती है।
