मकर संक्रांति भारत का एक बहुत ही प्रसिद्ध त्योहार है जो की हर साल जनवरी महीने में मनाया जाता है। यह त्योहार सिर्फ धार्मिक ही नहीं है बल्कि कृषि और संस्कृति से भी जुड़ा हुआ है। इस दिन से दिन भी बड़े होने लगते और वातावरण में भी बदलाव आता है। मकर संक्रांति की सबसे खास बात ये होती इसको भारत में हर राज्य के अंदर अलग-अलग नाम और पकवान के साथ मनाया जाता है। तिल और गुड से बनी मिठाई खाई जाती है। और कई जगह पर तो पोंगल, खिचड़ी, पीठ और दही-छुड़ा जैसा खाना भी बनाया जाता है।
आज के इस आर्टिकल में हम बात करने वाले है मकर संक्रांति के स्पेशल खाने की यहा पर हम बाहर के हर एक राज्य के खाने की बात करगे। आज के इस आर्टिकल में नॉर्थ से साउथ तक के भारत के प्रसिद्ध पकवानों की बात की गई है। अगर आप भारतीय त्योहार, परंपराओं से जुड़ी बाते जानना पसंद करते है। तो आज का ये आर्टिकल आप के लिए बहुत ही मजेदार होने वाला है।
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तिल लड्डू

तिल के लड्डू तिल और गुड से बनने वाली एक पारंपरिक मिठाई है। यह सर्दियों के मौसम की सबसे खास मिठाई है, जो मकर संक्रांति पर विशेष रूप से बनाई जाती है। ये लड्डू तिल और गुड़ को मिलाकर तैयार किए जाते हैं। ये लड्डू सर्दी के मौसम में शरीर को ऊर्जा देते है। तिल के लड्डू स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होते हैं। इसलिए इनको हर घर में बनाया जाता है। ये लड्डू सभी को एक साथ जोड़ते है और त्योहार की खुशियों को और भी मीठा बना देते है। तिल के लड्डू के साथ – साथ तिल की चिक्की, तेवड़ी, तिलकुट, तिल का हलवा और भी चीजे बनाई जा सकती है जो की मकर संक्रांति के त्योहार को और भी अच्छा बनाती है।
चावल और दूध की खीर

चावल और दूध की खीर मकर संक्रांति के लिए बहुत ही अच्छा है। ऐसे दिन पर यदि कुछ हल्का, मीठा और सबको पसंद आने वाली चीज बनानी हो, तो चावल और दूध की खीर एक अच्छा विकल्प है। यह एक ऐसी मिठाई है जो ज्यादा भरी नहीं होती है और लगभग हर उम्र के लोग इसे खाना पसंद करते है इस त्योहार के मौके पर खीर को प्रसाद के रूप में देना मेहमानों के लिए बनाना एक अच्छा विचार माना जा सकता है। मकर संक्रांति जैसे पवित्र और शांत त्योहार पर चावल और दूध की खीर एक ऐसा विचार है जो परंपरा और स्वाद को साथ लेकर चलता है।
उंधियू

उंधियू गुजरात का प्रसिद्ध खाना माना जाता है जो कि विशेष रूप से मकर संक्रांति के समय या ठंड में बनाया जाता है। यह ऐसा खाना है जो सर्दी के मौसम में मिलने वाली कई सब्जियों को एक साथ लेकर आता है। त्योहार के दिन उंधियू को पारिवारिक भोजन और मेहमान- नवाज़ी या विशेष अवसर के लिया चुना जा सकता है। क्योंकि यह एक साथ कई लोगों के लिए परोसा जा सकता है। मकर संक्रांति के मौके पर उंधियू को सभी के साथ मिल-बाँट और उत्सव के भाव से जोड़ा जाता है।। इसलिए जो लोग मकर संक्रांति के लिए सिर्फ मिठाई ही नहीं, बल्कि ऐसा खाना रखना चाहते है यो क्षेत्रीय पहचान और त्योहार दोनों को दर्शाए तो उनके लिए उंधियू एक अच्छा विकल्प माना जा सकता है।
स्वीट पोंगल – दक्षिण भारत की मिठी पहचान

मकर संक्रांति का नाम आते ही देश के हर कोने में अलग-अलग रंग और अलग-अलग व्यंजन याद आते है दक्षिण भारत में इस त्योहार की सबसी बड़ू पहचान है स्वीट पोंगल। यह मिठास के साथ समृद्धि और खुशी का भी प्रतीक माना जाता है। सस्वीट पोंगल को तमिल नाडु में सक्कराई पोंगल भी कहा जाता है। ये खाना खासकर पोंगल पर्व के दिन बनाया जाता है। स्वीट पोंगल एक सिम्पल सा लेकिन बहुत ही स्वादिष्ट मीठा होता है। इसे नए चावल, दाल, गुड़, घी… से बनाया जाता है।इन सभी चीजों की वजह से स्वीट पोंगल बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सबको पसंद आता है।
सूजी का हलवा

मकर संक्रांति का दिन सिर्फ पतंग और धूप का नहीं होता बल्कि घर की रसोई से आने वाली मिठास का भी होता है। उत्तर भारत में सूजी का हलवा बनाना बहुत ही आम बात है। यह एक ऐसी मिठाई है, जो हर घर में आसानी से बन जाती है और जिसे सभी खाना पसंद करते हैं। मकर संक्रांति पर गरम-गरम सूजी का हलवा खाना एक अलग ही सुकून देता है। सर्दियों के मौसम में घी से बना हलवा शरीर को गर्मी देता है और ताकत भी देता है। इसीलिए कई घरों में मकर संक्रांति के दिन सुबह-सुबह हलवा बनाया जाता है और भगवान को भोग लगाया जाता है।
छेना पोड़ा

मकर संक्रांति के मौके पर जब देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग मिठाइयाँ बनती हैं, तब ओडिशा में छेना पोडा एक खास पहचान बन कर समाने आता है। दूध से बना छेना पोड़ा गुड़ की मिठास से तैयार किया जाता है। मकर संक्रांति जैसे पवित्र त्योहार पर छेना पोडा बनाना और बांटना मिठास के साथ- साथ अपनापन दिखाता है। जब घर के सभी लोग एक साथ बैठकर इसे खाते है तो बातों में भी मिठास आ जाती है और पल भी यादों में बदल जाते है। आज के तेज़ जीवन में, जब हर चीज़ जल्दी में होती जा रही है,तो ऐसे में हम को ये चीजे रुक कर जीवन जीने का संदेश देती है। यह हमें याद दिलता है की असली स्वाद वक़्त देने से आता है।
पुरण पोली

मकर संक्रांति के दिन महाराष्ट्र और आस-पास के इलाकों में पुराण पोली घर-घर बनाई जाती है। गरम तव पर सेकही हुई ये मीठी रोटी सिर्फ पेट ही नहीं दिल भी भर देती है। गेहूं के आते की पतली पोली के अंदर कहना दाल और गुड का मीठा पूर्ण भर होता है। जो खाते ही मुँह में घुल जाता है। संक्रांति पर पुराण पोली बनाना सिर्फ एक रसम नहीं बल्कि परिवार के सब लोगों को एक साथ जोड़ने का मौका होता है। घर के बड़े-छोटे सभी मिलकर इसे खाते हैं और त्योहार की खुशी और भी बढ़ जाती है। मकर संक्रांति पर पुराण पोली की मिठास नए साल के लिए मीठी शुरुआत का संदेश देती है।
पुलियोगरे

पुलियोगरे दक्षिण भारत की एक बहुत ही प्रसिद्ध चीज है, जो खासतौर पर मकर संक्रांति जैसे पावन त्योहार पर बनाई जाती है। इसे इमली चावल भी कहा जाता है। खट्टा-मीठा और हल्का मसालेदार स्वाद भोजन माना जाता है। संक्रांति के दिन पुलियोगरे को भगवान को प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है और फिर पूरे परिवार में बाँटा जाता है। इसमें इमली का खट्टापन, गुड़ की हल्की मिठास और मसालों का तड़का मिलकर तैयार किया जाता है। मकर संक्रांति पर पुलियोगरे सिर्फ एक भोजन ही नहीं, बल्कि परंपरा का प्रतीक है। इसे केले के पत्ते पर परोसने की परंपरा भी है, जो इसे और भी खास बना देती है। यह डिश त्योहार की सादगी, स्वाद और सांस्कृतिक विरासत को खूबसूरती से दर्शाती है।
फाफड़ा-जलेबी – गुजरात का लोकप्रिय त्योहारी नाश्ता

मकर संक्रांति यानी उत्तरायण आते ही गुजरात में खुशियों का माहौल बन जाता है। इस खास मौके पर फाफड़ा-जलेबी खाना वहाँ की सबसे मशहूर और पसंदीदा परंपरा मानी जाती है। सुबह-सुबह पतंग उड़ाते हुए गरमागरम फाफड़ा और मीठी-रसीली जलेबी का मज़ा ही कुछ और होता है। जिसमें हल्के मसाले मिलाए जाते हैं। वहीं जलेबी अपनी मिठास और चाशनी में डूबी रसीली बनावट के लिए सबकी अच्छी होती है। गुजरात में इसे अक्सर पपीते की चटनी और तली हुई हरी मिर्च के साथ परोसा जाता है, जिससे इसका स्वाद और भी मस्त हो जाता है। मकर संक्रांति पर यह स्वादिष्ट थाली न सिर्फ पेट भरती है, बल्कि त्योहार की मिठास और परंपरा को भी खास बना देती
दाल चूरमा, दाल बाटी

मकर संक्रांति के दिन राजस्थान और हरियाणा में दाल चूरमा का एक अलग ही सवाद है। गरम- गरम दाल और घी में भीग चूरमा खाते ही एक दम अच्छा महसूस होता है। दाल का हल्का सा तीखा स्वाद और चूरमे की मीठी मिठास रक साथ मिलाकर खाने में एक अलग ही मज़ा आता है। त्योहार के दिन जब घर के लोग इससे एक साथ खाते है तो बातें हसी-मज़ाक और थोड़ा मस्ती का माहोल बन जाता है। मकर संक्रांति पर दाल चूरमा खाते ही लगते है जैसे त्योहार की असली शुरुआत यही होती है और पूरे दिन शरीर को ऊर्जा भी मिलती है।
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