करवाचौथ की पूजा एक बहुत ही पवित्र और पारंपरिक विधि है। ये वो शुभ दिन है, जिस दिन सुहागिन महिलायें पूरा दिन निर्जला उपवास रख कर अपने पति की लम्बी उम्र की कामना करती है। हमारे देश में इस दिन को बड़े हाई धूमधाम से मनाया जाता है। ऐसा माना जाता है की जो भी महिला इस व्रत को रखती है, उसे अखंड सौभाग्य प्राप्ति का वरदान मिलता है। और साथ ही उनके जीवन में अनेको खुशहाली आती है।अगर आप चाहते हैं कि आपके व्रत में किसी प्रकार का विघ्न न पड़े, तो हमारे द्वारा बतायी गयी पूजा विधि को अवश्य पढ़े। करवाचौथ का त्योहार हर सुहागन बड़े ही उत्साह के साथ मनाती है। करवाचौथ की चहल पहल बाज़ारों में कही दिनो पहले से ही शुरू हो जाती है। महिलायें अपने इस दिन और ज़्यादा ख़ास बनाने के लिए नए – नए तरह के कपड़े, मेकअप, चूड़ियो की ख़रीदारी करती है। और अपने पति के लिए उस दिन सजती सँवरती है।
साल 2025 में कब है करवाचौथ का शुभ मुहूर्त और तिथि

हर साल करवाचौथ का त्योहार कार्तिक मास की कृष्ण पक्ष की चतुर्थी तिथि को मनाया जाता है। इस साल ये शुभ दिन 10 अक्टूबर (शुक्रवार) को है।इस साल करवाचौथ के पूजा करने का टाइम शाम 5:57 बजे से 7:12 बजे तक है। चंद्र उदय (Moonrise): रात 8:13 बजे देखकर आप अपना व्रत खोल सकती है।
दिनचर्या और पूजन विधि
सरगी समय

करवाचौथ की सरगी बहुत खास होती है और यह व्रत का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है। सरगी सास (या घर की बड़ों) द्वारा बहू को दी जाती है और सूर्योदय से पहले इसे खाया जाता है। इसमें पौष्टिक और शुभ चीज़ें शामिल होती हैं। जैसे कि ड्राई फ़्रूट्स, फ़्रूट्स, मिठाई,पराठे, पूरी, सब्ज़ी इत्यादि। सरगी का सेवन करने के बाद आप अपना निर्जला व्रत शुरू कर सकते है।
दिन के समय
दिन के समय महिलाएँ पूजा पाठ करने के लिए अच्छे से तैयार होती है। महिलाएँ अपने पति के लिए अच्छे से सज – दज कर सोलह सिंगार करती है।इस दिन भक्ति गीत, कथा और व्रत की महत्ता सुनना/पढ़ना बहुत ही शुभ माना जाता है।
शाम का पूजन मुहूर्त (5:57 बजे से 7:12 बजे तक)

पूजन करने के लिए गणेश जी,माता पार्वती, भगवान शिव और कार्तिकेय की मूर्तियों / चित्रों का पूजा में रखे।मिट्टी के करवे में जल भरकर उसके ऊपर गेहूं या फिर चावल के दाने रखकर पूजा करे।इसी के साथ करवाचौथ की कथा सुने और थाली को एक – दूसरे की और घुमा कर व्रत कथा सुने।पूजा करने के बाद पति की लंबी आयु और वैवाहिक सुख-समृद्धि की कामना करें।
रात्रि के समय

रात्रि के समय सबसे पहले छलनी से चाँद को देखकर चंद्रमा को अर्घ दे।फिर उसी छलनी से पति का मुख देखे।इसके बाद पति अपनी पत्नी को जल पिलाकर और मिठाई खिलाकर उसका व्रत तुड़वा सकते है। इसी के साथ आपका व्रत सम्पूर्ण विधि के साथ पूरा हो जाता है।
कुछ ख़ास बातें
- इस व्रत में पत्नी का सोलह श्रृंगार करना अत्यंत शुभ माना जाता है।
- रात्रि के समय पूजा करने के लिए थाली में दीपक, सिंदूर, छलनी,रोली, चावल, फूल, करवा, मिठाई इत्यादि रखे।
- सच्ची श्रद्धा और आस्था के साथ व्रत को पूरा करे।
