आज के समय में हर स्टूडेंट के दिमाग में एक ही सवाल होता है की बोर्ड एग्जाम कैसे क्रैक करें? कितने घंटे पढ़ें? अगर आप भी क्लास 10th या 12th के स्टूडेंट हो और आपको लगता है की सिलेबस बहुत ज्यादा है। और समय बहुत कम है। तो टेंशन लेने की जरूरत नहीं है। हर एवरेज स्टूडेंट टॉपर बनना चाहता है।
लेकिन समस्या इंटेलिजेंस की नहीं होती समस्या होती है सही स्टडी रूटीन की अगर आप सही रूटीन के साथ नहीं पढ़ते है तो आसन सब्जेक्ट भी मुश्किल लगने लगता है। बहुत सारे बच्चे दिन भर किताब खोलकर बैठे रहते हैं। फिर भी अच्छा रिजल्ट नहीं आता है। और कुछ बच्चे सिर्फ 6–7 घंटे पढ़कर भी अच्छे मार्क्स ले आते हैं। डिफरेंस सिर्फ एक ही चीज का होता है। प्लैन्ड स्टडी रूटीन जो बच्चे प्लान बनाकर पढ़ते है वो कम समय में भी अच्छा कर जाते है।
बोर्ड एग्जाम ऐसे एग्जाम नहीं होते हैं जहाँ रटाकर पास हो जाया जाए। ये एग्जाम बच्चे का डिसिप्लिन, उनका टाइम मैनेजमेंट और उनकी पढ़ाई को टेस्ट करते है। इसलिए आज के इस आर्टिकल में हम आपके साथ एक ऐसा स्टडी रूटीन शेयर करने वाले हैं जो स्कूल के साथ भी मैनेज हो और कोचिंग के साथ भी चले।
यह रूटीन उन बच्चों के लिए जो ईमानदारी से पढ़ना चाहते हैं लेकिन कन्फ्यूज़ में फँसे हुए है। अगर आप सच में चाहते हो कि आप अपने बोर्ड एग्जाम में अच्छा रिजल्ट ला सकें, तो इस आर्टिकल को लास्ट तक ज़रूर पढ़ना। क्योंकि रूटीन आपकी पढ़ाई के साथ-साथ आपकी सोच भी बदल सकती है।
NCERT First Rule

NCERT बोर्ड परीक्षा की तैयारी में सबसे महत्वपूर्ण होती है। क्योंकि ज्यादा से ज्यादा प्रश्न सीधे NCERT पाठ्यपुस्तक से ही पूछे जाते है। NCERT किताबें विशेषज्ञ शिक्षकों द्वारा तैयार किया जाता है। अगर छात्र NCERT को लाइन दर लाइन ध्यान से पढ़ते हैं, तो उदाहरण, और पिछली कक्षाओं के अभ्यास प्रश्न आसानी से समझ में आ जाते हैं।
इससे उनका बेस भी मजबूत हो जाता है। बोर्ड परीक्षा में उत्तर लिखने का तरीका भी NCERT की सामग्री के अनुसार ही होता है। इसलिए बोर्ड परीक्षा की तैयारी से पहले कहा जाता है कि NCERT की पुस्तक से पढ़ाई करें।
छोटे समय से शुरू करें

छोटे समय से शुरू करने का मतलब है कि पढ़ाई को बहुत ज्यादा घंटे तक न पढ़ो बल्कि थोड़े समय से और रोजाना पढ़ने के तरीके से शुरू करो। अगर आप 8-10 घंटे के हिसाब से पढ़ना शुरू करोगे तो एक दिन में ही थकान हो जाएगी और बोरियत लगेगी और काफी दिन तक पढ़ने का मन भी नहीं करेगा।
इसलिए शुरुआत में सिर्फ 30-35 मिनट तक पढ़ो और बाढ़ में धीरे-धीरे समय को बढ़ाओ। रोज थोड़ा- थोड़ा पढ़ने से दिमाग पर दबाव नहीं पड़ता है और (कांसेप्ट) भी अच्छे से समझ आ जाता है। छोटे समय से शुरू की हुई पढ़ाई आगे चलकर सक्सेस बन जाती है।
आसान चैप्टर से शुरुआत करें

हमें अपनी पढ़ाई उन चैप्टरों से शुरू करनी चाहिए जो हमें पहले से थोड़े बहुत समझ में आ रहे हों। जब भी स्टूडेंट किसी आसन चैप्टर को पहले पूरा करता है। तो उसका आत्मविश्वास अपने आप बढ़ जाता है और अपने आप में लगता है की में भी अच्छे से पढ़ सकती या सकता हूँ। इससे पढ़ाई का डर कम होता है।
आसान चैप्टर से शुरुआत करने का एक फायदा ये भी होता है की हम को पढ़ाई करने का सही तरीका पता चल जाता है। जैसे कि लाइन दर लाइन पढ़ना, महत्वपूर्ण बिंदुओं को अंडरलाइन करना और प्रश्नों को हल करना जब ये सब आदत बन जाती है तब मुश्किल चैप्टर भी आसान लगने लगताहै। इसलिए अपनी पढ़ाई को मजबूत, सकारात्मक और आसान चैप्टरों से शुरू करें।
लिखकर पढ़ाई करें

पढ़ाई करने का मतलब सिर्फ बुक को देखर पढ़ना ही नहीं है। बल्कि जो पढ़ना है उसे लिख कर अभ्यास भी करना है। जब छात्र चैप्टर पढ़ने के बाद महत्वपूर्ण बिंदु, परिभाषाएं, और उत्तर अपनी कॉपी में लिखते हैं तो चीजें और बेहतर तरीके से दिमाग में बैठ जाती हैं।
लिखने से स्पेलिंग, प्रेज़न्टैशन और उतर लिखने की स्पीड भी सुधरती है। सिर्फ पढ़ने से लगता की सब याद है लेकिन लिखने पर पता चलता है की कितना कान्सेप्ट क्लेयर है। रोजाना लिखकर अभ्यास करना से आतमविश्वास बढ़ता है और परीक्षा के समय उतर आसानी से याद आ जाता है।
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रोज़ाना रिविज़न फिक्स रखें

आप दिन भर जो भी पढ़ते हो उसका रीविशन करना बहुत जरूरी है। रीविशन के बिना पढ़ाई अधूरी होती है। क्योंकि बिना दोहराए हुई चीजें जल्दी भूली जाती है। अगर स्टूडेंट रोज पढे गए टॉपिक को 20-30 मिनट रीविजन करता है तो कान्सेप्ट दिमाग में लंबे समय तक याद रहता है।
रेविज़न के समय सिर्फ अन्डर्लाइन की हुई लाइन, हेडिंग, शॉर्ट नोट और क्वेशन पर ध्यान देना चाहिए। इससे पूरा चैप्टर दोबारा पढ़ने की जरूरत नहीं पड़ती है और समय भी बचता है। रोजाना रीविशन फिक्स करने से पढ़ाई में निरंतरता बनी रहती है और आत्मविशास बढ़ता है। और बोर्ड परीक्षा के समय सिलेबस याद रखने में मदद मिलती है।
फोन से दूरी बनाएँ

फोन से दूरी बानए रखना यह है की परीक्षा की तैयारी के समय अपने फोन, सोशल मीडिया और नोटिफिकेशन को पूरी तरह बंद रखे। आजकल फोन हर स्टूडेंट के ध्यान भटकाने का सबसे बड़ा कारण बन गया है। जैसे व्हाट्सप्प, इंसाग्राम, यूट्यूब या मैसेज के चक्कर में हम अपना महत्वपूर्ण समय बर्बाद कर देते हैं। इसलिए पढ़ाई के समय फोन को साइलेंट मोड पर रखें या किसी दूसरे कमरे में रख दें।
जिससे पढ़ाई के समय पूरा ध्यान सिर्फ पढ़ाई पर ही रहे। यह आदत शुरू में थोड़ी मुश्किल लगती है लेकिन लंबे समय में आपके अंक और आत्मविश्वास पर इसका बहुत अच्छा प्रभाव पड़ता है। अगर आप इस नियम को लगातार फॉलो करते हैं तो आपकी तैयारी मजबूत हो जाती है। और बोर्ड परीक्षा के समय तनाव भी बहुत कम हो जाता है।
एक समय पर एक ही सब्जेक्ट पढ़ें

एक समय पर केवल एक ही विषय पढ़ें और बार-बार विषय न बदलें। जब छात्र अपने तय समय में सिर्फ एक ही विषय पर ध्यान ध्यान देता है तो उसका एकाग्रता स्तर और भी बेहतर हो जाता है। अगर आप थोड़ी-थोड़ी देर में विषय बदलते रहोगे तो दिमाग कन्फ्यूज़ हो जाता है और पढ़ाई फिर अच्छे से समझ में नहीं आती है।
ऐसा इसलिए क्योंकि हर विषय की भाषा टर्म और फ़्लो अलग होता है। एक विषय को लगतार पढ़ने से उस चैप्टर को शुरू से लास्ट तक अच्छे से समझा जा सकता है। और प्रश्नों का हल और रेवसीऑन भी अच्छा से हो जाता है। इस आदत से ढ़ाई का दबाव कम लगता है और बोर्ड परीक्षा के लिए अच्छी तैयारी हो पाती है।
अपने टारगेट लिखें

बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी के लिए सबसे बेहतरीन स्टडी रूटीन वही होता है जो सिर्फ अपने टारगेट पर फोकस रखता है। सबसे पहले अपना टारगेट स्पष्ट करें यानी कौन सा सब्जेक्ट आपको मजबूत बनाना है और फिर लगन के साथ उसी सब्जेक्ट की पढ़ाई करें। रोज़ उठकर अपने टारगेट को याद करें और अपने दिन का स्टडी प्लान उसी के हिसाब से बनाएं। खुद की किसी और से तुलना न करें। हर सब्जेक्ट को छोटे-छोटे गोल्स में बाँट दें जैसे कि आज केवल एक चैप्टर पढ़ना है या कुछ प्रश्न हल करने हैं। इससे दबाव कम होगा और आत्मविश्वास बढ़ेगा। जब फोकस स्पष्ट और अनुशासन मजबूत होता है तब बच्चा पढ़ाई सिर्फ टारगेट लिखने के लिए नहीं बल्कि अच्छे रिज़ल्ट लाने के लिए करता है।
मॉर्निंग + ईवनिंग कॉम्बो अपनाएँ

मॉर्निंग – ईव्निंग स्टडी कॉम्बो अपनाने से पढ़ाई अधिक संतुलित हो जाती है। सुबह के समय दिमाग ताजा होता है, इसलिए मॉर्निंग में थ्योरी, नए चैप्टर और कठिन टॉपिक पर ध्यान देना चाहिए। इस समय ध्यान करना आसान होता है और चीज़ें जल्दी याद रहती हैं।
शाम के समय में दिन भर पढे गए टॉपिक का रिवीजन, प्रश्न हल करना और उत्तर लेखन करना चाहिए। सुबह सीखी हुई चीज़ों को शाम में दोहराने से यादास शक्ति बढ़ती है और डर कम होता है। जो बच्चे बोर्ड एग्ज़ाम की तैयारी कर रहे उनके लिए ये तरीका बहुत अच्छा है।
प्रीवियस ईयर क्वेश्चन ज़रूर करें

पिछले सालों के एग्ज़ाम के प्रश्न पत्र जरूर हल करने चाहिए क्योंकि यह तैयारी का सबसे स्मार्ट तरीका है। पुराने सालों के प्रश्न हल करने से एग्ज़ाम पैटर्न, महत्वपूर्ण टॉपिक्स और प्रश्नों के दोहराए जाने की संभावना का स्पष्ट आइडिया मिलता है। स्टूडेंट को पता चलता है की कौन-सा प्रश्न कितने समय में हल करना चाहिए।
जब बच्चा पुराने प्रश्नों की प्रैक्टिस करता है, तो एग्ज़ाम का डर कम हो जाता है और उसे अपनी गलतियों को पहचानने और सुधारने का मौका मिलता है। जो फाइनल इग्ज़ैम के लिए बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है।
वीकली टेस्ट खुद लें

साप्ताहिक टेस्ट पढ़ाई को ट्रैक करने और उसमें सुधार लाने का सबसे अच्छा तरीका है। हर हफ्ते टेस्ट देने से स्टूडेंट को अपनी तैयारी का वास्तविक स्तर पता चलता है और कमजोर क्षेत्रों की स्पष्ट समझ मिलती है। इससे रोजाना रिवीजन होता रहता है और पढ़ाई लास्ट समय पर ज्यादा भारी नहीं लगती है।
टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और उन टॉपिक्स पर दोबारा ध्यान देना बहुत जरूरी है। इस रूटीन को अपनाने से एग्ज़ाम की तैयारी धीरे-धीरे मजबूत होती जाती है।

